Friday, April 15, 2022

शिखा (चोटी) का महत्व

 *💠🛑 शिखा (चोटी) 🛑💠*

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*🔶 शिखा का महत्त्व विदेशी जान गए, पर हिन्दू भूल गए । हिन्दू धर्म का छोटे से छोटा सिद्धान्त, छोटी से छोटी बात भी अपनी जगह पूर्णतया वैज्ञानिक एवं कल्याणकारी है । छोटी सी शिखा अर्थात् चोटी भी कल्याण एवं विकास का साधन बनकर अपनी पूर्णता व आवश्यकता को दर्शाती है । शिखा का त्याग करना मानो अपने कल्याण का त्याग करना है । जैसे घड़ी के छोटे पुर्जे की जगह बडा पुर्जा काम नहीं कर सकता, क्योंकि भले वह छोटा है, परन्तु उसकी अपनी महत्ता है । शिखा न रखने से हम जिस लाभ से वंचित रह जाते हैं, उसकी पूर्ति अन्य किसी साधन से नहीं हो सकती ।*


*🔶 हरिवंश पुराण में एक कथा आती है - हैहय व तालजंघ वंश के राजाओं ने शक, यवन, काम्बोज, पारद आदि राजाओं को साथ लेकर राजा बाहु का राज्य छीन लिया था । राजा बाहु अपनी पत्नी के साथ वन में चले गए । वहाँ राजा की मृत्यु हो गयी । महर्षि और्व ने उसकी गर्भवती पत्नी की रक्षा की और उसे अपने आश्रम में ले आए । वहाँ उसने एक पुत्र को जन्म दिया, जो आगे चलकर राजा सगर के नाम से प्रसिद्ध हुआ ।*


*🔶 राजा सगर ने महर्षि और्व से शस्त्र व शास्त्र की विद्या सीखी । समय पाकर राजा सगर ने हैहयों को मार डाला और फिर शक, यवन, काम्बोज, पारद आदि राजाओं को भी मारने का निश्चय किया । ये शक, यवन आदि राजा महर्षि वसिष्ठ की शरण में चले गए । महर्षि वसिष्ठ ने उन्हें कुछ शर्तों पर अभयदान दे दिया और राजा सगर को आज्ञा दी कि वे उनको न मारे । राजा सगर अपनी प्रतिज्ञा भी नहीं छोड़ सकते थे और महर्षि वसिष्ठ जी की आज्ञा भी नहीं टाल सकते थे । इसलिए उन्होंने उन राजाओं का सिर शिखा सहित मुँडवाकर छोड़ दिया ।*


*🔶 प्राचीन काल में किसी की शिखा काट देना मृत्यु दण्ड के समान माना जाता था । लेकिन बड़े दु:ख की बात है कि आज हिन्दू लोग अपने हाथों से ही अपनी शिखा काट रहे हैं । शिखा न रखना यह गुलामी मानसिकता की पहचान है, जबकि शिखा हिन्दुत्व की पहचान है । यह हमारे धर्म और संस्कृति की रक्षक है । इतिहास गवा है शिखा के विशेष महत्व के कारण ही हिन्दुओं ने यवन शासन के दौरान अपनी शिखा की रक्षा के लिए सिर कटवा दिए, पर शिखा नहीं कटवायी । भारतीय परम्परा में प्राचीन काल से ही सिर पर चोटी रखने का विधान है, जिसका वर्णन वेदों में भी मिलता है । दक्षिण भारत में तो आधे सिर पर 'गोखुर' के समान चोटी रखते हैं । चोटी बौद्धिक विकास में बड़ी सहायक सिद्ध होती है ।*


*🔶 प्रसिद्ध वैज्ञानिक डॉ० आई०ई० क्लार्क (एम.डी.) ने कहा है - "मैंने जब से इस विज्ञान की खोज की हैं तब से मुझे विश्वास हो गया है कि हिन्दुओं का हर एक नियम विज्ञान से परिपूर्ण है । चोटी रखना हिन्दू धर्म की मर्यादा ही नहीं, यह सुषुम्ना नाड़ी के केन्द्रों की रक्षा के लिए ऋषि-मुनियों की खोज का विलक्षण चमत्कार भी है ।"*


*🔶 इसी प्रकार पाश्चात्य विद्वान मिस्टर अर्ल थामस लिखते हैं - "सुषुम्ना की रक्षा हिन्दू लोग चोटी रखकर करते हैं, जबकि अन्य देशों में लोग सिर पर लम्बे बाल रखकर या हैट पहनकर करते हैं । इन सब में चोटी रखना सबसे लाभकारी है । किसी भी प्रकार से सुषुम्ना की रक्षा करना जरुरी है ।"*


*🔶 वास्तव में मानव शरीर को प्रकृति ने इतना सबल बनाया है कि वह बड़े से बड़े आघात को भी सहन करके रह जाता है । परन्तु शरीर में कुछ ऐसे भी स्थान हैं जिन पर आघात होने से मनुष्य की तत्काल मृत्यु हो सकती है, इन्हें मर्म स्थान कहा जाता है । शिखा के अधोभाग में भी मर्म स्थान होता है,* जिसके लिए सुश्रुताचार्य ने लिखा है -


       *मस्तकाभ्यन्तरोपरिष्टात्*

       *शिरासन्धि सन्निपातो ।*

       *रोमावर्तोऽधिपति*

       *स्तत्रपि सद्यो मरणम् ।।*


       अर्थात् मस्तक के भीतर ऊपर जहाँ बालों का आवर्त (भंवर) होता है, वहाँ सम्पूर्ण नाड़ियों व संधियों का मेल है, उसे 'अधिपति मर्म' कहा जाता है । यहाँ चोट लगने से तत्काल मृत्यु हो जाती है ।


*🔶 सुषुम्ना के मूल स्थान को 'मस्तुलिंग' कहते हैं । 'मस्तिष्क' के साथ ज्ञानेन्द्रियों - कान, नाक, जीभ, आँख आदि का सम्बन्ध है और कर्मेन्द्रियों - हाथ, पैर, गुदा, इन्द्रिय आदि का सम्बन्ध 'मस्तुलिंग' से है । मस्तिष्क व मस्तुलिंग जितने सामर्थ्यवान होते हैं, उतनी ही ज्ञानेन्द्रियों और कर्मेन्द्रियों की शक्ति बढ़ती है । मस्तिष्क ठण्डक चाहता है और मस्तुलिंग गर्मी । मस्तिष्क को ठण्डक पहुँचाने के लिए 'क्षौरकर्म' करवाना और मस्तुलिंग को गर्मी पहुँचाने के लिए 'गोखुर' के परिमाण के बाल रखना आवश्यक होता है । बाल कुचालक हैं, इसलिए चोटी के लम्बे बाल बाहर की अनावश्यक गर्मी या ठण्डक से मस्तुलिंग की रक्षा करते हैं ।*

Wednesday, April 13, 2022

हिन्दी और हिन्दू संस्कृति

 Read till END...

...

*विवाह उपरांत जीवन साथी को छोड़ने के लिए 2 शब्दों का प्रयोग किया जाता है* 

*1-Divorce (अंग्रेजी)* 

*2-तलाक (उर्दू)* 

*कृपया हिन्दी का शब्द बताए...??*


कहानी आजतक के Editor... *संजय सिन्हा की लिखी है...।* 


तब मैं... 'जनसत्ता' में... नौकरी करता था...। एक दिन खबर आई कि... एक आदमी ने झगड़े के बाद... अपनी पत्नी की हत्या कर दी...। मैंने खब़र में हेडिंग लगाई कि... *"पति ने अपनी बीवी को मार डाला"...!* खबर छप गई..., किसी को आपत्ति नहीं थी...। पर शाम को... दफ्तर से घर के लिए निकलते हुए... *प्रधान संपादक प्रभाष जोशी जी...* सीढ़ी के पास मिल गए...। मैंने उन्हें नमस्कार किया... तो कहने लगे कि... *"संजय जी..., पति की... 'बीवी' नहीं होती...!"*


*“पति की... 'बीवी' नहीं होती?”* मैं चौंका था


*" “बीवी" तो... 'शौहर' की होती है..., 'मियाँ' की होती है..., पति की तो... 'पत्नी' होती है...! "*


भाषा के मामले में... प्रभाष जी के सामने मेरा टिकना मुमकिन नहीं था..., हालांकि मैं कहना चाह रहा था कि... *"भाव तो साफ है न ?"* बीवी कहें... या पत्नी... या फिर वाइफ..., सब एक ही तो हैं..., लेकिन मेरे कहने से पहले ही... उन्होंने मुझसे कहा कि... *"भाव अपनी जगह है..., शब्द अपनी जगह...! कुछ शब्द... कुछ जगहों के लिए... बने ही नहीं होते...! ऐसे में शब्दों का घालमेल गड़बड़ी पैदा करता है...।"*


खैर..., आज मैं भाषा की कक्षा लगाने नहीं आया..., आज मैं रिश्तों के एक अलग अध्याय को जीने के लिए आपके पास आया हूं...। लेकिन इसके लिए... आपको मेरे साथ... निधि के पास चलना होगा...।


निधि... मेरी दोस्त है..., कल उसने मुझे फोन करके अपने घर बुलाया था...। फोन पर उसकी आवाज़ से... मेरे मन में खटका हो चुका था कि... कुछ न कुछ गड़बड़ है...! मैं शाम को... उसके घर पहुंचा...। उसने चाय बनाई... और मुझसे बात करने लगी...। पहले तो इधर-उधर की बातें हुईं..., फिर उसने कहना शुरू कर दिया कि... नितिन से उसकी नहीं बन रही और उसने उसे तलाक देने का फैसला कर लिया है...।


मैंने पूछा कि... "नितिन कहां है...?" तो उसने कहा कि... "अभी कहीं गए हैं..., बता कर नहीं गए...।" उसने कहा कि... "बात-बात पर झगड़ा होता है... और अब ये झगड़ा बहुत बढ़ गया है..., ऐसे में अब एक ही रास्ता बचा है कि... अलग हो जाएं..., तलाक ले लें...!"


निधि जब काफी देर बोल चुकी... तो मैंने उससे कहा कि... "तुम नितिन को फोन करो... और घर बुलाओ..., कहो कि संजय सिन्हा आए हैं...!"


निधि ने कहा कि... उनकी तो बातचीत नहीं होती..., फिर वो फोन कैसे करे...?!!!


अज़ीब सँकट था...! निधि को मैं... बहुत पहले से जानता हूं...। मैं जानता हूं कि... नितिन से शादी करने के लिए... उसने घर में कितना संघर्ष किया था...! बहुत मुश्किल से... दोनों के घर वाले राज़ी हुए थे..., फिर धूमधाम से शादी हुई थी...। ढ़ेर सारी रस्म पूरी की गईं थीं... ऐसा लगता था कि... ये जोड़ी ऊपर से बन कर आई है...! पर शादी के कुछ ही साल बाद... दोनों के बीच झगड़े होने लगे... दोनों एक-दूसरे को खरी-खोटी सुनाने लगे... और आज उसी का नतीज़ा था कि... संजय सिन्हा... निधि के सामने बैठे थे..., उनके बीच के टूटते रिश्तों को... बचाने के लिए...!


खैर..., निधि ने फोन नहीं किया...। मैंने ही फोन किया... और पूछा कि... "तुम कहां हो... मैं तुम्हारे घर पर हूँ..., आ जाओ...। नितिन पहले तो आनाकानी करता रहा..., पर वो जल्दी ही मान गया और घर चला आया...।


अब दोनों के चेहरों पर... तनातनी साफ नज़र आ रही थी...। ऐसा लग रहा था कि... कभी दो जिस्म-एक जान कहे जाने वाले ये पति-पत्नी... आंखों ही आंखों में एक दूसरे की जान ले लेंगे...! दोनों के बीच... कई दिनों से बातचीत नहीं हुई थी...!!


नितिन मेरे सामने बैठा था...। मैंने उससे कहा कि... "सुना है कि... तुम निधि से... तलाक लेना चाहते हो...?!!!


उसने कहा, “हाँ..., बिल्कुल सही सुना है...। अब हम साथ... नहीं रह सकते...।"


मैंने कहा कि... *"तुम चाहो तो... अलग रह सकते हो..., पर तलाक नहीं ले सकते...!"*


*“क्यों...???*


*“क्योंकि तुमने निकाह तो किया ही नहीं है...!”*


*"अरे यार..., हमने शादी तो... की है...!"*


*“हाँ..., 'शादी' की है...! 'शादी' में... पति-पत्नी के बीच... इस तरह अलग होने का... कोई प्रावधान नहीं है...! अगर तुमने 'मैरिज़' की होती तो... तुम "डाइवोर्स" ले सकते थे...! अगर तुमने 'निकाह' किया होता तो... तुम "तलाक" ले सकते थे...! लेकिन क्योंकि... तुमने 'शादी' की है..., इसका मतलब ये हुआ कि... "हिंदू धर्म" और "हिंदी" में... कहीं भी पति-पत्नी के एक हो जाने के बाद... अलग होने का कोई प्रावधान है ही नहीं....!!!"*


मैंने इतनी-सी बात... पूरी गँभीरता से कही थी..., पर दोनों हँस पड़े थे...! दोनों को... साथ-साथ हँसते देख कर... मुझे बहुत खुशी हुई थी...। मैंने समझ लिया था कि... *रिश्तों पर पड़ी बर्फ... अब पिघलने लगी है...!* वो हँसे..., लेकिन मैं गँभीर बना रहा...


मैंने फिर निधि से पूछा कि... "ये तुम्हारे कौन हैं...?!!!"


निधि ने नज़रे झुका कर कहा कि... "पति हैं...! मैंने यही सवाल नितिन से किया कि... "ये तुम्हारी कौन हैं...?!!! उसने भी नज़रें इधर-उधर घुमाते हुए कहा कि..."बीवी हैं...!"


मैंने तुरंत टोका... *"ये... तुम्हारी बीवी नहीं हैं...! ये... तुम्हारी बीवी इसलिए नहीं हैं.... क्योंकि... तुम इनके 'शौहर' नहीं...! तुम इनके 'शौहर' नहीं..., क्योंकि तुमने इनसे साथ "निकाह" नहीं किया... तुमने "शादी" की है...! 'शादी' के बाद... ये तुम्हारी 'पत्नी' हुईं..., हमारे यहाँ जोड़ी ऊपर से... बन कर आती है...!* तुम भले सोचो कि... शादी तुमने की है..., पर ये सत्य नहीं है...! तुम शादी का एलबम निकाल कर लाओ..., मैं सबकुछ... अभी इसी वक्त साबित कर दूंगा...!"


बात अलग दिशा में चल पड़ी थी...। मेरे एक-दो बार कहने के बाद... निधि शादी का एलबम निकाल लाई..., अब तक माहौल थोड़ा ठँडा हो चुका था..., एलबम लाते हुए... उसने कहा कि... कॉफी बना कर लाती हूं...।"


मैंने कहा कि..., "अभी बैठो..., इन तस्वीरों को देखो...।" कई तस्वीरों को देखते हुए... मेरी निगाह एक तस्वीर पर गई..., जहाँ निधि और नितिन शादी के जोड़े में बैठे थे...। और पाँव~पूजन की रस्म चल रही थी...। मैंने वो तस्वीर एलबम से निकाली... और उनसे कहा कि... "इस तस्वीर को गौर से देखो...!"


उन्होंने तस्वीर देखी... और साथ-साथ पूछ बैठे कि... "इसमें खास क्या है...?!!!"


मैंने कहा कि... "ये पैर पूजन का रस्म है..., तुम दोनों... इन सभी लोगों से छोटे हो..., जो तुम्हारे पांव छू रहे हैं...।"


“हां तो....?!!!"


“ये एक रस्म है... ऐसी रस्म सँसार के... किसी धर्म में नहीं होती... जहाँ छोटों के पांव... बड़े छूते हों...! *लेकिन हमारे यहाँ शादी को... ईश्वरीय विधान माना गया है..., इसलिए ऐसा माना जाता है कि... शादी के दिन पति-पत्नी दोनों... 'विष्णु और लक्ष्मी' के रूप हो जाते हैं..., दोनों के भीतर... ईश्वर का निवास हो जाता है...!* अब तुम दोनों खुद सोचो कि... क्या हज़ारों-लाखों साल से... विष्णु और लक्ष्मी कभी अलग हुए हैं...?!!! दोनों के बीच... कभी झिकझिक हुई भी हो तो... क्या कभी तुम सोच सकते हो कि... दोनों अलग हो जाएंगे...?!!! नहीं होंगे..., *हमारे यहां... इस रिश्ते में... ये प्रावधान है ही नहीं...! "तलाक" शब्द... हमारा नहीं है..., "डाइवोर्स" शब्द भी हमारा नहीं है...!"*


यहीं दोनों से मैंने ये भी पूछा कि... *"बताओ कि... हिंदी में... "तलाक" को... क्या कहते हैं...???"*


दोनों मेरी ओर देखने लगे उनके पास कोई जवाब था ही नहीं फिर मैंने ही कहा कि... *"दरअसल हिंदी में... 'तलाक' का कोई विकल्प ही नहीं है...! हमारे यहां तो... ऐसा माना जाता है कि... एक बार एक हो गए तो... कई जन्मों के लिए... एक हो गए तो... प्लीज़ जो हो ही नहीं सकता..., उसे करने की कोशिश भी मत करो...! या फिर... पहले एक दूसरे से 'निकाह' कर लो..., फिर "तलाक" ले लेना...!!"*


*अब तक रिश्तों पर जमी बर्फ... काफी पिघल चुकी थी...!*


निधि चुपचाप मेरी बातें सुन रही थी...। फिर उसने कहा कि... "भैया, मैं कॉफी लेकर आती हूं...।"


वो कॉफी लाने गई..., मैंने नितिन से बातें शुरू कर दीं...। बहुत जल्दी पता चल गया कि... *बहुत ही छोटी-छोटी बातें हैं..., बहुत ही छोटी-छोटी इच्छाएं हैं..., जिनकी वज़ह से झगड़े हो रहे हैं...।*


खैर..., कॉफी आई मैंने एक चम्मच चीनी अपने कप में डाली...। नितिन के कप में चीनी डाल ही रहा था कि... निधि ने रोक लिया..., “भैया..., इन्हें शुगर है... चीनी नहीं लेंगे...।"


लो जी..., घंटा भर पहले ये... इनसे अलग होने की सोच रही थीं...। और अब... इनके स्वास्थ्य की सोच रही हैं...!


मैं हंस पड़ा मुझे हंसते देख निधि थोड़ा झेंपी कॉफी पी कर मैंने कहा कि... *"अब तुम लोग... अगले हफ़्ते निकाह कर लो..., फिर तलाक में मैं... तुम दोनों की मदद करूंगा...!"*


शायद अब दोनों समझ चुके थे.....


*हिन्दी एक भाषा ही नहीं - संस्कृति है...!*


*इसी तरह हिन्दू भी धर्म नही - सभ्यता है...!!*


👆उपरोक्त लेख मुझे बहुत ही अच्छा लगा..., *जो सनातन धर्म और संस्कृति से जुड़ा है...।* आप सभी से निवेदन है कि... समय निकाल कर इसे पढ़ें..., गौर करें..., अच्छा लगे तो... आप अ

पने मित्रों... व आपके पास जो भी समूह हैं... उनमें प्रेषित करे...। 👏👏

Sunday, March 27, 2022

हिन्दुस्तान का इतिहास

  



#इतिहासनामा👇👇👇

🌎 1857 के बाद हमने अपनी भारतभूमि का लगभग पचास लाख वर्ग किलोमीटर भूभाग गँवा दिया। 


👉 ज्यादा अतीत में न जायें तो भी 1857 की क्रांति के बाद अंग्रेज प्रशासनिक अफसर जब कलकत्ता के अपने दफ़्तर में बैठते थे तो प्रोटोकॉल के अनुसार उनके पीछे की दीवार पर उस भारत का मानचित्र लगा होता था जिसे वो "इंडिया" कहकर पुकारते थे।


👉 दरअसल, आज का भारत सीमित भूभाग वाला देश है। लेकिन भारत कभी बहुत बड़ा भूभाग वाला देश था। यह सिर्फ कश्मीर से कन्याकुमारी और असम से गुजरात ही तक सीमित नहीं था बल्कि अखंड भारत में आने वाले वर्तमान के देश भारत, अफगानिस्तान, पाकिस्तान, तिब्बत, भूटान, म्यांमार, बांग्लादेश, श्रीलंका, मलेशिया, फिलिपिंस, थाइलैंड, वियतनाम, कंबोडिया, इंडोनेशिया, लाओस, ईरान, तजाकिस्तान, किरगिजस्तान, कजाकास्तान आदि।


👉 सन् 1875 तक यह भारत के ही भाग थे लेकिन 1857 की क्रांति के पश्चात ब्रिटिश साम्राज्य की नींव हिल गई थी। उन्हें लगा की इतने बड़े भू-भाग का दोहन एक केन्द्र से करना सम्भव नहीं है एवं फुट डालो एवं शासन करो की नीति अपनायी एवं भारत को अनेकानेक छोटे-छोटे हिस्सो में बाँट दिया केवल इतना ही नहीं यह भी सुनिश्चित किया की कालान्तर में भारतवर्ष पुनः अखण्ड न बन सके।


👉 1857 से 1947 तक भारत के कई टुकड़े हुए और बन गए सात नए देश। 1947 में बना पाकिस्तान भारतवर्ष का पिछले 2500 सालों में एक तरह से 24वां विभाजन था।


👉 आपको जानकर आश्चर्य होगा कि उस नक़्शे के अनुसार 1857 की क्रांति के समय भारत का क्षेत्रफल था लगभग 83 लाख वर्ग किलोमीटर जो आज घटकर मात्र लगभग 33 लाख वर्ग-किलोमीटर रह गया है।


🤷🏻‍♂️ यानि 1857 के बाद हमने अपनी भारतभूमि का लगभग पचास लाख वर्ग किलोमीटर भूभाग गँवा दिया।


मगर न तो हमें वेदना है न ही कोई शर्म 🙁



*आवश्यक सूचना* 📣


*यदि आपको राजनीति🌷में रुचि नहीं है,*

 तो........ 

*गलत व्यक्ति✋🧹*

*आप पर राज करने लगता है..।*


🚩धर्मो रक्षति रक्षितः

🇮🇳हिन्दू राष्ट्र भारत


10th results 2022 Bihar school examination board, patna

 


बिहार विद्यालय परीक्षा समिति पटना मैट्रिक 2022 का परिणाम निम्न लिंक पर देखें|


 

 


 

Click here👉 Link 2 result 

 Click here👉 Link 3 

Click here👉 Link 4

The Bihar School Examination Board will be announced the Bihar Board 10th Result 2022 today. The BSEB will release the Bihar Board 10th Result 2022 around 3 PM. 

 

Saturday, January 8, 2022

धर्मरक्षापञ्चाङ्गम् 2022-23, Dharmraksha panchang

 🙏🚩जय श्री राम🚩🙏


 *धर्मरक्षापंचाग २०२२-२३* आपके कर कमलो में अर्पित करते हुए हमें बहुत आनन्द आ रहाी है।यह पंचांग सभी के लिए उपयोगी एवं सरल है अतः आपलोग इस पंचांग का अध्ययन करें तथा अपने मित्रों के पास भेजे और सनातन धर्म का प्रचार-प्रसार करें|



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 धर्मरक्षापञ्चाङ्गम् 2022-23, प्रस्तुति- पं. श्री संतोष तिवारी सम्पर्क सूत्र- 6299953415



आपको पंचाग कैसा लगा, हमें बताएं- https://wa.me/916299953415

Monday, January 3, 2022

Vaidic science वैदिक चिकित्सा पद्धति

 *🕉️वेदों में सूर्य किरण चिकित्सा🌞*




*🔶सूर्य किरण से नाना प्रकार के कीटाणु नष्ट हो जाते हैं। वाष्प स्नान से जो लाभ होता है वही लाभ धूप स्नान से होता है। धूप स्नान से रोम कूप खुल जाते हैं और शरीर से पर्याप्त मात्रा में पसीना निकलता है और शरीर के अन्दर का दूषित पदार्थ गल कर बाहर निकल जाता है। जिससे स्वास्थ्य सुधर जाता है।*


*🔶जिन गायों को बाहर धूप में घूमने नहीं दिया जाता है और सारे दिन घर में ही रख कर खिलाया-पिलाया जाता है, उनके दुग्ध में विटामिन डी विशेष मात्रा में नहीं पाया जाता है।*

*उदय काल का सूर्य निखिल विश्व का प्राण है। प्राणःप्रजानामुदयत्येष सूर्यः प्राणोपनिषद् 1/8 सूर्य प्रजाओं का प्राण बन कर उदय होता है।*


*🔶अथर्ववेद में सूर्य किरणों से रोग दूर करने की चर्चा है। अथर्ववेद काँड 1 सूक्त 22 में-*

*अनुसूर्यमुदयताँ हृदयोतो हरिमा चते। गौ रोहितस्य वर्णन तेन त्वा परिद्धयसि॥ 1॥*

*अर्थ- हे रोगाक्राँत व्यक्ति। तेरा हृदय धड़कन, हृदयदाह आदि रोग और पाँडुरोग सूर्य के उदय होने के साथ ही नष्ट हो जायं। सूर्य के लाल रंग वाले उदयकाल के सूर्य के उस उदय कालिक रंग से भरपूर करते हैं।*


*🔶इस मंत्र में सूर्य की रक्त वर्ण की किरणों को हृदय रोग के नाश करने के लिए प्रयोग करने का उपदेश है। सूर्य किरण चिकित्सा के अनुसार कामला और हृदयरोग के रोगी को सूर्य की किरणों में रखे लाल काँच के पात्र में रखे जल को पिलाने का उपदेश है।*


*“परित्वा रोहितेर्वर्णेदीर्घायुत्वाय दम्पत्ति। यथायमरपा असदथो अहरितो भुवत्॥ 2॥*

*अर्थ- हे पाँडुरोग से पीड़ित व्यक्ति। दीर्घायु प्राप्त कराने के लिए तेरे चारों ओर सूर्य की किरणों से लाल प्रकाश युक्त आवरणों में तुझे रखते हैं जिससे यह तू रोगी पाप के फलस्वरूप रोग रहित हो जाय और जिससे तू पाँडुरोग से भी मुक्त हो जाय।*

*ऐसे रोगियों को नारंगी, सन्तरे, सेब, अंगूर आदि फलों को खिलाने तथा गुलाबी रंग के पुष्पों से विनोद कराना भी अच्छा है।*


*या रोहिणी दैवत्या गावो या उत रोहिणीः। रुपं रुपं वयोवयस्तामिष्ट्रवा परिदध्यसि॥ 3॥*

*अर्थ- जो देव, प्रकाश सूर्य की प्रातःकालीन रक्त वर्ण की किरणें हैं और जो लाल वर्ण की कपिला गायें हैं या उगने वाली औषधियाँ हैं उनके भीतर विद्यमान कान्तिजनक चमक को और दीर्घायु जनक उन द्वारा तुझको सब प्रकार से परिपुष्ट करते हैं।*


*🔶हृदयरोग के सम्बन्ध में वाव्यटूट अष्ठग संग्रह हृदय रोग निदान अ. 5 में लिखते हैं, पाँच प्रकार का हृदय रोग होता है वातज, पितज, कफज, त्रिदोषज और कृमियों से। इनके भिन्न-2 लक्षण प्रकट होते हैं। इसी प्रकार पाँडुरोग का एक विकृत रूप हलीमक है। उसमें शरीर हरा, नीला, पीला हो जाता है। उसके सिर में चक्कर, प्यास, निद्रानाश, अजीर्ण और ज्वर आदि दोष अधिक हो जाते हैं। इनकी चिकित्सा में रोहिणी और हारिद्रव और गौक्षीर का प्रयोग दर्शाया गया है। रोहित रोहिणी, रोपणाका, यह एक ही वर्ग प्रतीत होता है। हारिद्रव हल्दी और इसके समान अन्य गाँठ वाली औषधियों का ग्रहण है। शुक भी एक वृक्ष वर्ग का वाचक है।*


*🔶अथर्ववेद काण्ड 6, सूक्त 83 में गंडमाला रोग को सूर्य से चिकित्सा करने का वर्णन है।*

*अपचितः प्रपतत सुपर्णों वसतेरिव। सूर्यः कृणोतु भेषजं चन्द्रमा वो पोच्छतु॥*

*(अथर्व. 6। 83।1)*

*अर्थ- हे गंडमाला ग्रन्थियों। घोंसले से उड़ जाने वाले पक्षी के समान शीघ्र दूर हो जाओ। सूर्य चिकित्सा करे अथवा चन्द्रमा इनको दूर करे।*

*यहाँ सूर्य की किरणों से गंडमाला की चिकित्सा करने का उपदेश है। नीले रंग की बोतल से रक्त विकार के विस्फोटक दूर होते हैं। यही प्रभाव चंद्रालोक का भी है। रात में चन्द्रातप में पड़े जल से प्रातः विस्फोटकों को धोने से उनकी जलन शान्ति होती है और विष नाश होता है।*

*एन्येका एयेन्येका कृष्णे का रोहिणी वेद। सर्वासामग्रभं नामावीरपूनीरपेतन॥*

*(अथर्व. 6। 83। 2)*


*अर्थ- गंडमालाओं में से एक हल्की लाल श्वेत रंग की स्फोटमाला होती है, दूसरी श्वेत फुँसी होती है। तीसरी एक काली फुँसियों वाली होती है। और दो प्रकार की लाल रंग की होती है उनको क्रम से ऐनी, श्येनी, कृष्णा और रोहिणी नाम से कहा जाता है। इन सबका शल्य क्रिया के द्वारा जल द्रव पदार्थ निकालता हूँ। पुरुष का जीवन नाश किये बिना ही दूर हो जाओ।*


*असूतिका रामायणयऽपचित प्रपतिष्यति। ग्लोरितः प्र प्रतिष्यति स गलुन्तो नशिष्यति ॥*

*(अथर्व. 6।83।3)*


*अर्थ- पीव उत्पन्न न करने वाली गंडमाला, रक्तनाड़ियों के मर्म स्थान में होने वाली, ऐसी गंडमाला भी पूर्वोक्त उपचार से विनाश हो जायेगी। इस स्थान से व्रण की पीड़ा भी विनाश हो जायेगी।*


*वीहि स्वामाहुतिं जुषाणो मनसा स्वाहा यदिदं जुहोमि। (अथर्व. 6।83।4)*

*अर्थ- अपने खाने-पीने योग्य भाग को मन से पसन्द करता हुआ सहर्ष खा, जो यह सूर्य किरणों से प्रभावित जल, दूध, अन्नादि पदार्थ मैं देता हूँ।*


*सं ते शीष्णः कपालानि हृदयस्य च यो विधुः। उद्यन्नादित्य रश्मिमिः शीर्ष्णो रोगमनीनशोंग भेदमशीशमः।*

*(अथर्व. 9।8।22)*


*अर्थ- हे रोगी तेरे सिर के कपाल सम्बन्धी रोग और हृदय की जो विशेष प्रकार की पीड़ा थी वह अब शाँत हो गई है। हे सूर्य! तू उदय होता हुआ ही अपनी किरणों से सिर के रोग को नाश करता है और शरीर के अंगों को तोड़ने वाली तीव्र वेदना को भी शाँत कर देता है।*


*इस प्रकार समस्त रोगों को सूर्य उदय होता हुआ अपनी किरणों से दूर करता है।*


*🔶धूप स्नान करते समय रोगी का शरीर नग्न होना चाहिए। जब सूर्य की किरणें त्वचा पर पड़ती है तो उससे विशेष लाभ होता है। सिर को सदैव धूप लगने से बचाना चाहिए। छाजन(एक्जिमा) रोग में धूप स्नान से बहुत लाभ होता है। यदि शरीर का कोई प्रधान अंग निर्बल हो गया हो, तो धूप स्नान से उन्हें लाभ होता है। कुछ रोगों में धूप स्नान मना भी है* 


*यथा सभी प्रकार के ज्वर में।*

*इस तरह से वेदों में नैसर्गिक सूर्य क्रिया चिकित्सा का स्पष्ट वर्णन है।*