Saturday, January 8, 2022

धर्मरक्षापञ्चाङ्गम् 2022-23, Dharmraksha panchang

 🙏🚩जय श्री राम🚩🙏


 *धर्मरक्षापंचाग २०२२-२३* आपके कर कमलो में अर्पित करते हुए हमें बहुत आनन्द आ रहाी है।यह पंचांग सभी के लिए उपयोगी एवं सरल है अतः आपलोग इस पंचांग का अध्ययन करें तथा अपने मित्रों के पास भेजे और सनातन धर्म का प्रचार-प्रसार करें|



Download

Download fastest

 धर्मरक्षापञ्चाङ्गम् 2022-23, प्रस्तुति- पं. श्री संतोष तिवारी सम्पर्क सूत्र- 6299953415



आपको पंचाग कैसा लगा, हमें बताएं- https://wa.me/916299953415

Monday, January 3, 2022

Vaidic science वैदिक चिकित्सा पद्धति

 *🕉️वेदों में सूर्य किरण चिकित्सा🌞*




*🔶सूर्य किरण से नाना प्रकार के कीटाणु नष्ट हो जाते हैं। वाष्प स्नान से जो लाभ होता है वही लाभ धूप स्नान से होता है। धूप स्नान से रोम कूप खुल जाते हैं और शरीर से पर्याप्त मात्रा में पसीना निकलता है और शरीर के अन्दर का दूषित पदार्थ गल कर बाहर निकल जाता है। जिससे स्वास्थ्य सुधर जाता है।*


*🔶जिन गायों को बाहर धूप में घूमने नहीं दिया जाता है और सारे दिन घर में ही रख कर खिलाया-पिलाया जाता है, उनके दुग्ध में विटामिन डी विशेष मात्रा में नहीं पाया जाता है।*

*उदय काल का सूर्य निखिल विश्व का प्राण है। प्राणःप्रजानामुदयत्येष सूर्यः प्राणोपनिषद् 1/8 सूर्य प्रजाओं का प्राण बन कर उदय होता है।*


*🔶अथर्ववेद में सूर्य किरणों से रोग दूर करने की चर्चा है। अथर्ववेद काँड 1 सूक्त 22 में-*

*अनुसूर्यमुदयताँ हृदयोतो हरिमा चते। गौ रोहितस्य वर्णन तेन त्वा परिद्धयसि॥ 1॥*

*अर्थ- हे रोगाक्राँत व्यक्ति। तेरा हृदय धड़कन, हृदयदाह आदि रोग और पाँडुरोग सूर्य के उदय होने के साथ ही नष्ट हो जायं। सूर्य के लाल रंग वाले उदयकाल के सूर्य के उस उदय कालिक रंग से भरपूर करते हैं।*


*🔶इस मंत्र में सूर्य की रक्त वर्ण की किरणों को हृदय रोग के नाश करने के लिए प्रयोग करने का उपदेश है। सूर्य किरण चिकित्सा के अनुसार कामला और हृदयरोग के रोगी को सूर्य की किरणों में रखे लाल काँच के पात्र में रखे जल को पिलाने का उपदेश है।*


*“परित्वा रोहितेर्वर्णेदीर्घायुत्वाय दम्पत्ति। यथायमरपा असदथो अहरितो भुवत्॥ 2॥*

*अर्थ- हे पाँडुरोग से पीड़ित व्यक्ति। दीर्घायु प्राप्त कराने के लिए तेरे चारों ओर सूर्य की किरणों से लाल प्रकाश युक्त आवरणों में तुझे रखते हैं जिससे यह तू रोगी पाप के फलस्वरूप रोग रहित हो जाय और जिससे तू पाँडुरोग से भी मुक्त हो जाय।*

*ऐसे रोगियों को नारंगी, सन्तरे, सेब, अंगूर आदि फलों को खिलाने तथा गुलाबी रंग के पुष्पों से विनोद कराना भी अच्छा है।*


*या रोहिणी दैवत्या गावो या उत रोहिणीः। रुपं रुपं वयोवयस्तामिष्ट्रवा परिदध्यसि॥ 3॥*

*अर्थ- जो देव, प्रकाश सूर्य की प्रातःकालीन रक्त वर्ण की किरणें हैं और जो लाल वर्ण की कपिला गायें हैं या उगने वाली औषधियाँ हैं उनके भीतर विद्यमान कान्तिजनक चमक को और दीर्घायु जनक उन द्वारा तुझको सब प्रकार से परिपुष्ट करते हैं।*


*🔶हृदयरोग के सम्बन्ध में वाव्यटूट अष्ठग संग्रह हृदय रोग निदान अ. 5 में लिखते हैं, पाँच प्रकार का हृदय रोग होता है वातज, पितज, कफज, त्रिदोषज और कृमियों से। इनके भिन्न-2 लक्षण प्रकट होते हैं। इसी प्रकार पाँडुरोग का एक विकृत रूप हलीमक है। उसमें शरीर हरा, नीला, पीला हो जाता है। उसके सिर में चक्कर, प्यास, निद्रानाश, अजीर्ण और ज्वर आदि दोष अधिक हो जाते हैं। इनकी चिकित्सा में रोहिणी और हारिद्रव और गौक्षीर का प्रयोग दर्शाया गया है। रोहित रोहिणी, रोपणाका, यह एक ही वर्ग प्रतीत होता है। हारिद्रव हल्दी और इसके समान अन्य गाँठ वाली औषधियों का ग्रहण है। शुक भी एक वृक्ष वर्ग का वाचक है।*


*🔶अथर्ववेद काण्ड 6, सूक्त 83 में गंडमाला रोग को सूर्य से चिकित्सा करने का वर्णन है।*

*अपचितः प्रपतत सुपर्णों वसतेरिव। सूर्यः कृणोतु भेषजं चन्द्रमा वो पोच्छतु॥*

*(अथर्व. 6। 83।1)*

*अर्थ- हे गंडमाला ग्रन्थियों। घोंसले से उड़ जाने वाले पक्षी के समान शीघ्र दूर हो जाओ। सूर्य चिकित्सा करे अथवा चन्द्रमा इनको दूर करे।*

*यहाँ सूर्य की किरणों से गंडमाला की चिकित्सा करने का उपदेश है। नीले रंग की बोतल से रक्त विकार के विस्फोटक दूर होते हैं। यही प्रभाव चंद्रालोक का भी है। रात में चन्द्रातप में पड़े जल से प्रातः विस्फोटकों को धोने से उनकी जलन शान्ति होती है और विष नाश होता है।*

*एन्येका एयेन्येका कृष्णे का रोहिणी वेद। सर्वासामग्रभं नामावीरपूनीरपेतन॥*

*(अथर्व. 6। 83। 2)*


*अर्थ- गंडमालाओं में से एक हल्की लाल श्वेत रंग की स्फोटमाला होती है, दूसरी श्वेत फुँसी होती है। तीसरी एक काली फुँसियों वाली होती है। और दो प्रकार की लाल रंग की होती है उनको क्रम से ऐनी, श्येनी, कृष्णा और रोहिणी नाम से कहा जाता है। इन सबका शल्य क्रिया के द्वारा जल द्रव पदार्थ निकालता हूँ। पुरुष का जीवन नाश किये बिना ही दूर हो जाओ।*


*असूतिका रामायणयऽपचित प्रपतिष्यति। ग्लोरितः प्र प्रतिष्यति स गलुन्तो नशिष्यति ॥*

*(अथर्व. 6।83।3)*


*अर्थ- पीव उत्पन्न न करने वाली गंडमाला, रक्तनाड़ियों के मर्म स्थान में होने वाली, ऐसी गंडमाला भी पूर्वोक्त उपचार से विनाश हो जायेगी। इस स्थान से व्रण की पीड़ा भी विनाश हो जायेगी।*


*वीहि स्वामाहुतिं जुषाणो मनसा स्वाहा यदिदं जुहोमि। (अथर्व. 6।83।4)*

*अर्थ- अपने खाने-पीने योग्य भाग को मन से पसन्द करता हुआ सहर्ष खा, जो यह सूर्य किरणों से प्रभावित जल, दूध, अन्नादि पदार्थ मैं देता हूँ।*


*सं ते शीष्णः कपालानि हृदयस्य च यो विधुः। उद्यन्नादित्य रश्मिमिः शीर्ष्णो रोगमनीनशोंग भेदमशीशमः।*

*(अथर्व. 9।8।22)*


*अर्थ- हे रोगी तेरे सिर के कपाल सम्बन्धी रोग और हृदय की जो विशेष प्रकार की पीड़ा थी वह अब शाँत हो गई है। हे सूर्य! तू उदय होता हुआ ही अपनी किरणों से सिर के रोग को नाश करता है और शरीर के अंगों को तोड़ने वाली तीव्र वेदना को भी शाँत कर देता है।*


*इस प्रकार समस्त रोगों को सूर्य उदय होता हुआ अपनी किरणों से दूर करता है।*


*🔶धूप स्नान करते समय रोगी का शरीर नग्न होना चाहिए। जब सूर्य की किरणें त्वचा पर पड़ती है तो उससे विशेष लाभ होता है। सिर को सदैव धूप लगने से बचाना चाहिए। छाजन(एक्जिमा) रोग में धूप स्नान से बहुत लाभ होता है। यदि शरीर का कोई प्रधान अंग निर्बल हो गया हो, तो धूप स्नान से उन्हें लाभ होता है। कुछ रोगों में धूप स्नान मना भी है* 


*यथा सभी प्रकार के ज्वर में।*

*इस तरह से वेदों में नैसर्गिक सूर्य क्रिया चिकित्सा का स्पष्ट वर्णन है।*

Thursday, December 30, 2021

देशभक्त को हम भूल गये।

 क्यो झूठ बोलते हो साहेब चरखे से आजादी आयी है


जलती रही जोहर में नारियां

 भेड़िये फ़िर भी मौन थे।

 हमें पढाया गया अकबर महान,

तो फिर महाराणा प्रताप कौन थे।


सड़ती रही लाशें सड़को पर

 गांधी फिर भी मौन थे,

हमें पढ़ाया गांधी के चरखे से आजादी आयी,

तो फांसी चढ़ने वाले 25-25 साल के वो जवान कौन थे


वो रस्सी आज भी संग्रहालय में है

जिस्से गांधीजी बकरी बांधा करते थे

किन्तु वो रस्सी कहां है

जिस पे भगत सिंह , सुखदेव और राजगुरु हसते हुए झूले थे


जाने कितने झूले थे फाँसी पर, कितनो ने

गोली खाई थी |

क्यो झूठ बोलते हो साहब, कि चरखे से

आजादी आई थी ||

चरखा हरदम खामोश रहा, और अंत देश

को बांट दिया |

लाखों बेघर,लाखो मर गए, जब गाँधी ने

बंदरबाँट किया ||

जिन्ना के हिस्से पाक गया , नेहरू को

हिन्दुस्तान मिला |

जो जान लुटा गए भारत पर, उन्हे ढंग

का न सम्मान मिला |

इन्ही सियासी लोगों ने, शेखर को भी

आतंकी बतलाया था |

रोया अलफ्रेड पार्क था उस दिन, एक

एक पत्ता थर्राया था ||

जो देश के लिए जिये मरे और फाँसी के

फंदे पर झूल गए |

हमें नेहरु गांधी तो याद रहे, पर अमर

पुरोधा हम भूल गए ||


कैसे मै सम्मान करु गाँधी वाली

सीखो का...!! . .

मै तो कर्जदार हूँ भगत_सिंह

की चीखो का..

दुश्मन की गोलियों का सामना हम करेंगे ,

हम आजाद है आजाद ही रहेंगे ।

🙏🌹शत शत नमन🌹🙏

Thursday, December 2, 2021

तुंगनाथ मंदिर, रुद्रप्रयाग उत्तराखंड

 


*🛕तुंगनाथ मंदिर, रुद्रप्रयाग(उत्तराखंड)*


*♦️तुंगनाथ उत्तराखण्ड के गढ़वाल के रुद्रप्रयाग जिले में स्थित एक पर्वत है। तुंगनाथ पर्वत पर स्थित है तुंगनाथ मंदिर, जो 3460 मीटर की ऊँचाई पर बना हुआ है और पंच केदारों में सबसे ऊँचाई पर स्थित है। यह मंदिर १,००० वर्ष पुराना माना जाता है और यहाँ भगवान शिव की पंच केदारों में से एक के रूप में पूजा होती है।*


*♦️इस मंदिर को पाण्‍डवों ने भगवान शिव को प्रसन्‍न करने के लिए स्‍थापित किया था। इसके पीछे कथा मिलती है कि कुरुक्षेत्र में हुए नरसंहार से भोलेनाथ पाण्‍डवो से रुष्‍ट थे तभी उन्‍हें प्रसन्‍न करने के लिए ही इस मंदिर का निर्माण किया गया था।*


*♦️तुंगनाथ का शाब्दिक अर्थ 'पीक के भगवान' है। इस मंदिर में भगवन शिव के हाथ कि पूजा की जाती है, जो कि वास्तुकला के उत्तर भारतीय शैली का प्रतिनिधित्व करती है। मंदिर के मुख्य प्रवेश द्वार पर नंदी भगवान की मूर्ति है, जो भगवान शिव का आरोह है।*


*♦️काला भैरव और व्यास के रूप में लोकप्रिय हिंदू संतों की मूर्तियों भी पांडवों की छवियों के साथ मंदिर में निहित हैं। इसके अलावा, विभिन्न देवी देवताओं के छोटे छोटे मंदिरों को इस मंदिर के आसपास देखा जा सकता है। भारी बर्फबारी की वजह से यह मंदिर नवंबर और मार्च के बीच में बंद रहता है।*

Sunday, November 21, 2021

ब्रह्मा मंदिर, पुष्कर राजस्थान

 *🛕ब्रह्म मन्दिर, पुष्कर(राजस्थान)*


*🕉️पुष्कर राजस्थान में विख्यात तीर्थस्थान है। यह राजस्थान के अजमेर जिले में है। मंदिर मूल रूप से 14वीं सदी में बनाया गया था। यह मंदिर ब्रह्मा का एकमात्र मन्दिर है। पुष्कर अजमेर शहर से 14 की.मी दूरी पर स्थित है। मंदिर पुष्कर झील के किनारे पर स्थित है।*


*🕉️पुष्कर के उद्धव का वर्णन प्रद्मपुराण में मिलता है। मान्यता है कि ब्रह्मों ने यहां आकार यज्ञ किया था। महाभारत के वन पर्व के अनुसार श्रीकृष्ण ने पुष्कर में दीर्घकाल तक तपस्या की थी। मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम ने भी अपने पिता दशरथ का श्राद्ध पुष्कर में किया था।* 


*🕉️ब्रह्मा के मंदिर के अरिक्ति यहां सावित्री, बदरीनारायण, वाराह और शिव आत्मेश्वर के मंदिर है। यहां के प्राचीन मंदिरों को मुगल आक्रांता औंरगजेब ने नष्टभ्रष्ट कर दिया था। पुष्कर का उल्लेख रामायण में भी हुआ है।*

मिस्र में मिला सूर्य मंदिर

 


*🔊मिस्र में एक 4,500 वर्ष पुराना सूर्य मंदिर जमीन से निकाला गया है। माना जाता है कि प्राचीन मिस्र में वहां के पिरामिड काल के राजाओं ने सूर्य की उपासना को प्रचलित करने के उद्देश्य से अनेक सूर्य मंदिर बनवाए थे।* 


*🔰पुरातत्वविदों ने ऐसे लगभग 6 सूर्य मंदिरों की खोज की है, लेकिन अभी तक एक मंदिर के अवशेष खुदाई से प्राप्त हुए हैं।*


*🔰लेकिन इससे यह तो तय है कि प्राचीन काल में मिस्र के लोग सूर्य देव और सनातन संस्कृति की उपासना करते थे।*


 *सनातन संस्कृति 🙏🧡🚩*

Friday, November 19, 2021

अपने सनातन संस्कृति को बचाओं

  

ये पाँच करोड़़ी बाँह मरोड़ी, बंगलादेशी किसने जोड़ी। 

बंगाल असम बिहार हजम, आबाद आबादी किसने तोडी़। 


और पाँच लाख कश्मीरी हिंदू, दर दर भटकें ये हाल किया। 

वोटबैंक बस सधा रहे, रत्ती का नहीं मलाल किया। 


कश्मीर बनाया कैराना, धूलागढ माल्दा झाँकी है। 

कुन्नूर केरला का कहता, चड्ढी लंगोट तो बाकी है। 


गोरी गजनी अकबर महान, औरंगजेब तो दयावान। 

बीर मराठे चोर उच्चके, सिख गुरूओं का कौन मान। 


एेसा ही इतिहास लिखाया, चोल अहोम का नाम मिटाया। 

ताजमहल को माथ धरे, अजंता एलोरा को झुठलाया। 


आर्यभट्ट बाराह मिहिर, तुम पर कर देते घना तिमिर। 

कम्पुटर की भाषा संस्कृत, करती तुमको अतिशय बिचलित। 


तुम कालिदास के काल बने,शेक्सपियर के ढाल बने। 

छोड़ ब्यास बाल्मिकी बिदुर, इकबाली सुरताल बने। 


देश बंटे और हिंदू घटे, नक्सलवादी आकाश चढ़े। 

सिख जैन लिंगायत तक, तेरी करनी का भेंट चढ़े।